कोरोना से लड़ाई तो बस मजाक हो गयी, जिंदगी से भी महंगी ये शराब हो गयी| बेशक ही कमाई ये देगी मगर, ये हराम की कमाई कब से हलाल हो गयी| आज देखा जो उमड़ता सैलाब भीड़ का ये हवस ये जोश उन्माद भीड़ का, सांसों निवालों पर भारी प्याला देख"मनोज"की अक्ल हैरान हो गयी| दुकान बंद मजदूरी बंद सड़क बंद सब घर में बंद, और गांव को निकलेअपने पाँव कुछ लोग चंद| कहीं फाकाकशी कहीं मौत का डर कहीं डर से खुद ही खुदकुशी, फिर भी ऐसे हालात में आपदाओं के आघात में क्यूं फिर क्यूं हर गली मोड़ पर मदिरा की बरसात हो गयी| रोजगार से वंचित जन के संचित धन पर, सरकार की चाल कुठाराघात हो गयी| गहने बिकेंगे गिरवी होंगे कई शिशु बिना ही दूध रहेंगे, तिजोरियां भरेंगे शराब व्यापारी लोग ठगे महसूस करेंगे| अबतक जनरक्षक पुलिस हमारी मदिरालय में तैनात हो गयी, अबतक तो सब लॉकडाऊन था अब ये मेला क्या बात हो गयी| कोरोना से इस प्रचंड जंग में दारू की प्रबल बिसात हो गयी, अबतक इससे धोते थे हाथ अब ये धोने जानो से भी हाथ हो गयी| जिंदगी से महंगी शराब देखकर रोते आसमां से बरसात हो गयी, जिंदगी से महंगी शराब देखकर रोते आसमां से बरसात हो गयी| -मनोज कक्कड़ 'मनोज'
'जिंदगी से भी महंगी ये शराब हो गयी'